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Monday, 8 February 2016

अधूरापन

वो जो वक़्त गुजारा था, तुम्हारे साथ कभी,
उनमे कुछ मैं भी गुजरा था तभी
जब लौट कर आया तुमसे अलग
तो मैं वो न रहा, जो था मैं कभी ।
कुछ अधूरा सा हो गया हूँ मैं,
लगता है कुछ तुम्हारे पास रह गया हूँ मैं ।
अधूरा हँसता हूँ, अधूरा रोता हूँ
आजकल मैं अक्सर अधूरा होता हूँ ।

कहीं भूल तो नही आया मैं खुद को तुम्हारे पास,
उन पलो में जब चलते थे हम लेकर हाथो में हाथ
कहीं तुम्हारे सिरहाने मैं ही तो नहीं
या उन बातों में शायद जो रह गयी अनकही ।
जरा अपनी बाहों में देखना, शायद मैं ही लिपटा हूँ
बन कर आंसू कोई, पलको के किनारे सिमटा हूँ ।

ये अधूरापन अच्छा नहीं लगता
मिल जाऊ मैं कभी, तो लौटा जाना मुझे
या फिर तुम ही मिल कर मुझमे
कर देना पूरा मुझे ।

Sunday, 22 November 2015

जाने दो यारो, क्या करना है

जो बीत गया सो बीत गया
अब फसानों का क्या करना है
जब पुराना वक़्त ही न रहा
तो पुरानी बातो का क्या करना है
जब कदम बड़ा ही लिए तुमने वक़्त क साथ
तो झूठे अफसानों का क्या करना है
कभी पसंद था तुम्हे अब नहीं हूँ
इतनी सी बात है,
बात को दिल से लगा कर क्या करना है

नया सफ़र


फूल गुलिसतां बहारे,
मैं ये नज़ारे, सारे छोड़ रहा हु
बेडी सी बन गए है जो
ये बंधन सारे तोड़ रहा हु
अब नज़रो में बस वो सूरज है
जो क्षितिज पर देखो अभी भी चमक रहा है।
हो गयी हे देर थोड़ी
पर मेरे लिए देखो रुका हुआ है।

सुहानी रात तब तलक न आएगी
जब तलक ये माटी मूरत न बन जाएगी
खुद को को ज़र्रा ज़र्रा तोड़ कर
में मोतियो की एक माला जोड़ रहा हु।

हर कदम सफलता न मिले, न सही
अभी मंजिल का सफ़र बाकी है
एक खूबसूरत तस्वीर बनाने को
मैं लकीरो से लकीरे जोड़ रहा हूं ।

Friday, 6 November 2015

झूठ का हुनर


झूठ बोलने का हुनर हम भी सीख रहे है,
पता चला है, रिश्ते ऐसे ही बनाये जाते है।
सच की डुगडुगी बस्ते में बंद कर दी है
सच्चे लोग  महफ़िलो में कहाँ बुलाये जाते है।

झूठ कहो तो सम्मान काफी मिलता है,
खाने को मीठा पकवान भी मिलता है।
सच का करेला हमेशा नीम चडा होता है,
इसलिये तो लोग झूठ की चाशनी में नहाये होते है।

झूठ कहो तो तारीफे, सच कहो तो मुसीबत।
झूठ कहो तो सब ख़ुशी ख़ुशी, सच कहो तो तोहमत।
सच्ची बातें कोई नहीं करता,
सब यहाँ झूठे अफ़साने गाए जाते है।